Zomato और Urban Company के गिग वर्कर्स अब रिटायरमेंट के लिए भी कर रहे बचत, NPS में हर हफ्ते हजारों रुपये कर रहे जमा

देश में तेजी से बढ़ रही गिग इकॉनमी के बीच अब डिलीवरी पार्टनर और सर्विस प्रोफेशनल्स केवल रोजमर्रा की कमाई पर ही ध्यान नहीं दे रहे, बल्कि अपने भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाने की दिशा में भी कदम बढ़ा रहे हैं। HDFC Pension के अनुसार, Zomato और Urban Company से जुड़े कई गिग वर्कर्स राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) से जुड़ रहे हैं और नियमित रूप से इसमें निवेश कर रहे हैं। कुछ लोग तो हर सप्ताह 5,000 रुपये तक का योगदान भी कर रहे हैं।

यह बदलाव इस बात का संकेत माना जा रहा है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के बीच भी अब दीर्घकालिक वित्तीय योजना को लेकर जागरूकता बढ़ रही है।

गिग वर्कर्स के लिए आसान बनाया गया NPS से जुड़ना

HDFC Pension ने बताया कि पारंपरिक कर्मचारियों की तुलना में गिग वर्कर्स के लिए पेंशन योजना में शामिल होना पहले काफी जटिल माना जाता था। इस समस्या को दूर करने के लिए कंपनी ने संबंधित संस्थाओं के सहयोग से ऐसी प्रक्रिया विकसित की, जिसमें ई-श्रम पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर गिग वर्कर्स का पंजीकरण आसान बनाया गया।

इस नई व्यवस्था की मदद से बड़ी संख्या में डिलीवरी पार्टनर्स और अन्य प्लेटफॉर्म वर्कर्स को NPS से जोड़ा गया। कंपनी का कहना है कि शुरुआत में ही लाखों पेंशन खाते खोले जा सके, जिससे इस पहल को गति मिली।

साप्ताहिक कमाई से सीधे कट रही निवेश राशि

कंपनी ने महसूस किया कि केवल पेंशन खाता खोल देना पर्याप्त नहीं है। इसलिए नई व्यवस्था में कर्मचारियों से शुरुआत में ही पूछा जाता है कि वे हर सप्ताह अपनी कमाई में से कितनी राशि भविष्य के लिए बचाना चाहते हैं।

जो राशि कर्मचारी स्वयं तय करते हैं, वही उनकी साप्ताहिक कमाई से स्वतः NPS खाते में जमा हो जाती है। इस मॉडल से नियमित निवेश करना आसान हो गया है और कर्मचारियों को अलग से भुगतान करने की जरूरत नहीं पड़ती।

कुछ कर्मचारी हर महीने कर रहे बड़ा निवेश

HDFC Pension के अनुसार, अधिकांश गिग वर्कर्स अपनी आय के अनुसार छोटी या मध्यम राशि जमा कर रहे हैं। वहीं कुछ ऐसे भी सदस्य हैं जिन्होंने हर सप्ताह 5,000 रुपये तक निवेश करने का विकल्प चुना है। यानी ऐसे कर्मचारी एक महीने में लगभग 20,000 रुपये तक अपने रिटायरमेंट फंड में जमा कर रहे हैं।

कंपनी का कहना है कि यह दिखाता है कि कई गिग वर्कर्स अब भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को गंभीरता से लेने लगे हैं।

जयपुर से हुई शुरुआत, दूसरे शहरों तक पहुंची योजना

Urban Company के साथ इस पहल की शुरुआत सबसे पहले जयपुर में की गई थी। यहां इसे अच्छी प्रतिक्रिया मिली, जिसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से दूसरे शहरों में भी लागू किया जा रहा है। कंपनी का मानना है कि आने वाले समय में और अधिक गिग वर्कर्स इस योजना से जुड़ेंगे।

तकनीक से आसान हुई पूरी प्रक्रिया

पेंशन खाता खोलने की प्रक्रिया को पहले की तुलना में काफी तेज और सरल बनाया गया है। डिजिटल तकनीक की मदद से अब कुछ ही मिनटों में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा सकती हैं। इससे दस्तावेजी प्रक्रिया कम हुई है और नए सदस्यों के लिए पंजीकरण आसान हो गया है।

भविष्य की वित्तीय सुरक्षा की ओर बढ़ता कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि गिग इकॉनमी में काम करने वाले लोगों के लिए नियमित पेंशन बचत एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे भविष्य में आर्थिक सुरक्षा मजबूत हो सकती है और असंगठित क्षेत्र के लाखों कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद भी वित्तीय सहारा मिलने की संभावना बढ़ेगी।

ऐसे समय में जब गिग सेक्टर लगातार विस्तार कर रहा है, NPS जैसी योजनाओं से जुड़ाव इस कार्यबल के लिए लंबे समय में एक मजबूत सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा कवच साबित हो सकता है।