भारतीय शेयर बाजार में कई महीनों तक लगातार बिकवाली करने के बाद अब विदेशी निवेशकों का रुख बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की धारणा में सुधार के संकेत मिले हैं। हालांकि, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें अब भी बाजार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल ने कहा कि पिछले दो वर्षों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़ी मात्रा में पूंजी निकाली है। ऐसे में हाल के दिनों में निवेशकों की बदलती सोच बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा सकती है।
लंबे समय की बिकवाली के बाद बदला रुख
रामदेव अग्रवाल के अनुसार, पिछले दो वर्षों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार में लगातार बिकवाली की। उनका कहना है कि ऊंचे वैल्यूएशन, दूसरे देशों के बाजारों में बेहतर रिटर्न और वैश्विक निवेश रुझानों की वजह से भारत से पूंजी का बहिर्वाह देखने को मिला।
हालांकि, उन्होंने बताया कि पिछले एक सप्ताह के दौरान विदेशी निवेशकों का नजरिया कुछ सकारात्मक हुआ है। उनके मुताबिक, लगातार बिकवाली के बाद भारतीय शेयर बाजार अब विदेशी निवेशकों को अपेक्षाकृत आकर्षक दिखाई देने लगा है और यही वजह है कि निवेश की रुचि फिर से बढ़ती नजर आ रही है।
भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतें बनी चिंता
बाजार के प्रति सकारात्मक संकेतों के बावजूद अग्रवाल ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियां अभी भी अनिश्चित बनी हुई हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भारत जैसे आयातक देशों की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम आने वाले समय में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
घरेलू अर्थव्यवस्था को बताया मजबूत
रामदेव अग्रवाल का मानना है कि भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत स्थिति में है। उन्होंने ऑटोमोबाइल बिक्री, वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह और बैंकिंग क्षेत्र में बढ़ते ऋण वितरण को अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत बताया।
उनके अनुसार, देश में आर्थिक गतिविधियां तेज हो रही हैं और इसका सकारात्मक असर कॉरपोरेट आय तथा शेयर बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।
ब्याज दरों को लेकर क्या है अनुमान?
मौद्रिक नीति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आगे भी वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फैसला ले सकता है। उनका मानना है कि यदि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं करता है, तो RBI भी संतुलित रुख अपना सकता है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में तेजी से बढ़ रही क्रेडिट ग्रोथ पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि इससे अल्पकाल में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
बॉन्ड इंडेक्स में देरी पर क्या बोले विशेषज्ञ?
ब्लूमबर्ग की ओर से भारतीय सरकारी बॉन्ड्स को अपने ग्लोबल एग्रीगेट बॉन्ड इंडेक्स में शामिल करने की प्रक्रिया टालने पर भी बाजार विशेषज्ञों ने प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि इसे भारत की अर्थव्यवस्था की कमजोरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला वैश्विक बाजार परिस्थितियों और परिचालन संबंधी तैयारियों से जुड़ा हो सकता है। उनका मानना है कि भारत की मजबूत आर्थिक बुनियाद और स्थिर वित्तीय व्यवस्था लंबे समय में विदेशी निवेशकों को आकर्षित करती रहेगी।
निवेशकों के लिए क्या संकेत हैं?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की वापसी के शुरुआती संकेत भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक हो सकते हैं। हालांकि, निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि निवेश संबंधी कोई भी निर्णय लेने से पहले अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।
