दिल्ली-एनसीआर में पुराने वाहनों को लेकर एक नया कानूनी विवाद सामने आया है। 10 साल पुरानी डीजल कार के मालिक ने आरोप लगाया है कि उनकी गाड़ी उत्सर्जन परीक्षण (Emission Test) में सफल होने के बावजूद पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट जारी नहीं किया जा रहा है। इस मामले को लेकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि PUC प्रमाणपत्र नहीं मिलने के कारण उन्हें वाहन के लिए ईंधन भी नहीं मिल पा रहा है, जिससे कार का उपयोग करना लगभग असंभव हो गया है।
एमिशन टेस्ट पास करने के बाद भी नहीं मिला PUC
याचिका में दावा किया गया है कि संबंधित वाहन एक 10 साल पुरानी डीजल कार है, जिसने प्रदूषण जांच सफलतापूर्वक पास कर ली थी। इसके बावजूद PUC केंद्र के सॉफ्टवेयर ने वाहन की उम्र के आधार पर प्रमाणपत्र जारी करने से इनकार कर दिया।
वाहन मालिक का कहना है कि तकनीकी प्रणाली में लगी रोक की वजह से PUC सर्टिफिकेट जारी नहीं हो रहा, जबकि वाहन निर्धारित उत्सर्जन मानकों पर खरा उतरता है।
सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश का दिया हवाला
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में अपने संशोधित आदेश में स्पष्ट किया था कि केवल वाहन की उम्र के आधार पर 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों के खिलाफ दंडात्मक या जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी, खासकर यदि वे निर्धारित उत्सर्जन मानकों का पालन करते हों।
याचिका में कहा गया है कि मौजूदा व्यवस्था अदालत के इसी आदेश के विपरीत प्रतीत होती है।
सॉफ्टवेयर की वजह से आ रही दिक्कत
याचिकाकर्ता के अनुसार, उन्हें बताया गया कि PUC केंद्रों में इस्तेमाल किए जा रहे सॉफ्टवेयर में ऐसे वाहनों के लिए प्रमाणपत्र जारी करने का विकल्प उपलब्ध नहीं है, जो निर्धारित आयु सीमा पार कर चुके हैं। यही वजह है कि उत्सर्जन परीक्षण पास होने के बावजूद प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा रहा।
इस स्थिति के कारण वाहन में ईंधन भरवाने में भी समस्या आ रही है, क्योंकि कई स्थानों पर वैध PUC प्रमाणपत्र के बिना ईंधन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है। अब अदालत इस बात पर विचार करेगी कि क्या वर्तमान व्यवस्था उसके पहले दिए गए आदेशों के अनुरूप है या नहीं।
इस मामले की सुनवाई के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि निर्धारित आयु पूरी कर चुके लेकिन प्रदूषण मानकों पर खरे उतरने वाले वाहनों के लिए PUC प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया क्या होगी।
क्या था सुप्रीम कोर्ट का पहले का फैसला?
गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पुराने वाहनों को लेकर पहले भी कई आदेश जारी किए जा चुके हैं। अक्टूबर 2018 में पुराने डीजल और पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध से जुड़े निर्देश दिए गए थे। बाद में दिसंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित आदेश जारी करते हुए कहा था कि केवल वाहन की उम्र के आधार पर बीएस-IV और उससे नए उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों के खिलाफ स्वतः दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
अब इस नए मामले पर आने वाला अदालत का फैसला दिल्ली-एनसीआर के हजारों वाहन मालिकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
